घनसाली:- स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव और एंबुलेंस की देरी ने ली एक और गर्भवती महिला की जान, क्षेत्र में आक्रोश।

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घनसाली/टिहरी गढ़वाल।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लचर स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर एक मासूम जान पर भारी पड़ी हैं। भिलंगना ब्लॉक के ग्राम पोखार निवासी एक 28 वर्षीय गर्भवती महिला की समय पर उपचार न मिल पाने और 108 आपातकालीन सेवा की देरी के कारण मृत्यु हो गई। इस हृदयविदारक घटना से स्थानीय जनता में भारी रोष व्याप्त है।
मृतक महिला, आरती रावत (पत्नी प्रवीन रावत), जो कि गर्भवती थी और अपनी 7 माह की दुधमुंही बच्ची के साथ देहरादून से एक विवाह समारोह में शामिल होने गांव आई थी। मंगलवार, 5 मई को अचानक पेट दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर परिजनों द्वारा उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बेलेश्वर लाया गया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद, महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत ऋषिकेश एम्स (AIIMS) के लिए रेफर कर दिया।

परिजनों का आरोप है कि रेफर किए जाने के बाद ‘108’ एंबुलेंस सेवा को सूचना दी गई, लेकिन एंबुलेंस एक घंटे की देरी से अस्पताल पहुंची। एंबुलेंस के इंतजार में बहुमूल्य समय बर्बाद हो गया। ऋषिकेश ले जाते समय रास्ते में आगराखाल के समीप आरती की स्थिति और बिगड़ गई, जिसके बाद उसे रात 8:00 बजे श्रीदेव सुमन राजकीय उप जिला चिकित्सालय, नरेंद्रनगर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सीएचसी बेलेश्वर के चिकित्सा प्रभारी डॉ. शिव प्रसाद भट्ट ने बताया कि मरीज दोपहर 1:00 बजे अस्पताल पहुंची थी और स्थिति को देखते हुए 2:00 बजे ही रेफर कर दिया गया था। उन्होंने श्रीनगर जाने की सलाह दी थी, परंतु परिजन ऋषिकेश एम्स के लिए निकले।

घटना की सूचना मिलते ही तहसीलदार अयोध्या प्रसाद उनियाल और प्रभारी निरीक्षक कृष्णराज शर्मा ने अस्पताल पहुंचकर परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। फिलहाल पुलिस को किसी भी पक्ष से लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है।

डेढ़ वर्ष पूर्व विवाहित आरती की असामयिक मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने दुर्गम क्षेत्रों में एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की होती, तो आज एक मां और उसके अजन्मे बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।