लद्दाख की ज़ांस्कर घाटी में ‘द हंस फ़ाउंडेशन’ के ‘स्पेशियलिटी हेल्थ कैंप–2026’ का सफल समापन, हजारों ग्रामीणों को मिला निःशुल्क उपचार।
ज़ांस्कर (लद्दाख):- भौगोलिक रूप से देश के सबसे चुनौतीपूर्ण और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में शुमार लद्दाख की ज़ांस्कर घाटी में ‘द हंस फ़ाउंडेशन’ के तत्वावधान में आयोजित ‘स्पेशियलिटी हेल्थ कैंप–2026’ का आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। ‘दृष्टि लौटाना’, ‘उम्मीद जगाना’, ‘मानवता की सेवा’ और ‘सीमाओं से परे स्वास्थ्य सेवा’ के संकल्प के साथ 7 जून से 15 जून 2026 तक चले इस नौ दिवसीय व्यापक मानवीय स्वास्थ्य अभियान से घाटी के हजारों सुदूरवर्ती ग्रामीणों को सीधा लाभ पहुँचा है।
भारत सरकार के राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) की परिकल्पना के अनुरूप, इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों को उनके घर के समीप ही गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा प्रदान करना था। इस पुनीत कार्य में ‘एमडीएसडी रोटरी आई हॉस्पिटल, कुल्लू’ और ‘एकॉर्ड हॉस्पिटल, फ़रीदाबाद’ ने महत्वपूर्ण तकनीकी और चिकित्सीय सहयोग प्रदान किया।
अभियान के तहत द हंस फ़ाउंडेशन के डॉक्टरों, नेत्र रोग विशेषज्ञों, फार्मासिस्टों, लैब टेक्नीशियनों, ऑप्टोमेट्रिस्टों और सपोर्टिंग स्टाफ सहित 28 स्वास्थ्य पेशेवरों की एक समर्पित टीम ने स्टोड वैली और लुंगनाक घाटी सहित ज़ांस्कर के सबसे दुर्गम और कटे हुए गांवों का दौरा कर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं।
मुख्य सेवाएँ और उपलब्धियाँ एक नज़र में:
चिकित्सा शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को पहली बार विभिन्न प्रकार की उन्नत डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सेवाएँ निःशुल्क प्रदान की गईं, जिनमें प्रमुख आंकड़े निम्नलिखित हैं:
कुल प्रदान की गई स्वास्थ्य सेवाएँ: 2,304
सामान्य स्वास्थ्य परामर्श (OPD): 747 लोग
नेत्र जाँच व उपचार: 550 लोग
मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन: 38 मरीज (कुल 64 मरीजों में मोतियाबिंद की पहचान की गई, शेष को अग्रिम परामर्श दिया गया है)
निःशुल्क चश्मा वितरण: 168 लोगों को पढ़ने के लिए तथा 65 लोगों को दृष्टि दोष सुधार हेतु विशेष चश्मे दिए गए।
डायग्नोस्टिक टेस्ट: 582 लैब टेस्ट, 77 ईसीजी (ECG) और 51 एक्स-रे किए गए।
विभिन्न चरणों में पहुँचाई गई राहत:
इस मोबाइल हेल्थ कैंप ने ज़ांस्कर घाटी के विभिन्न केंद्रों पर पहुँचकर अपनी सेवाएँ दीं:
07 जून: पदुम (लॉन्च कैंप)
08 जून: फे गांव (स्टोड वैली)
09 जून: चा गांव (लुंगनाक घाटी)
10 जून: कार्षा और यूलसोम वैली
11 जून: अब्रान गांव (स्टोड वैली)
13–15 जून: सरकारी अस्पताल, पदुम (विशेष मोतियाबिंद सर्जरी कार्यक्रम)
स्थानीय सहभागिता और प्रशासनिक सहयोग:
इस मिशन की एक और उल्लेखनीय विशेषता स्थानीय युवाओं और विशेषकर छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने भाषा की बाधा (Language Barrier) को दूर करते हुए पंजीकरण और अनुवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस भगीरथ प्रयास को सफल बनाने में ज़ांस्कर के चा-निर्वाचन क्षेत्र के काउंसलर स्टैनज़िन लाकपा और पदुम की ब्लॉक मेडिकल ऑफ़िसर डॉ. स्टैनज़िन अंगमो का विशेष प्रशासनिक सहयोग रहा। पूरे अभियान का कुशल नेतृत्व द हंस फ़ाउंडेशन के डिप्टी डायरेक्टर (ग्रांट्स एंड प्रोजेक्ट्स) विकास वर्मा द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरी प्लानिंग, रिसोर्स मैनेजमेंट और फील्ड क्रियान्वयन को धरातल पर उतारा।
