घनसाली: बैरियर चौक पर ‘राम मूर्ति’ स्थापना पर छिड़ा विवाद, पूर्व विधायक ने शासनादेश का हवाला देकर उठाए सवाल।

उत्तराखंड घनसाली टिहरी गढ़वाल ब्रेकिंग न्यूज

घनसाली (टिहरी गढ़वाल):- नगर पंचायत घनसाली का बैरियर चौक इन दिनों एक नई बहस का केंद्र बन गया है। भगवान राम की मूर्ति स्थापना के निर्णय ने जहाँ एक ओर आस्था के स्वर मुखर किए हैं, वहीं दूसरी ओर पूर्व विधायक भीमलाल आर्य के कड़े विरोध ने इसे कानूनी और नीतिगत मोड़ दे दिया है।
​क्या है।
आपको बता दें कि ​विवाद की जड़ में वर्ष 2015 का एक शासनादेश और क्षेत्रीय अस्मिता का मुद्दा है। पूर्व विधायक भीमलाल आर्य का कहना है कि जिस स्थान पर भगवान राम की मूर्ति स्थापित की जा रही है, वहां वास्तव में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रणेता और ‘उत्तराखंड के गांधी’ के नाम से विख्यात स्व. इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा लगाई जानी थी।
पूर्व विधायक के अनुसार, 2015 में सरकार ने स्पष्ट रूप से इसी चौराहे पर बडोनी जी की मूर्ति स्थापना का आदेश जारी किया था, जिसकी अनदेखी की जा रही है। आर्य ने तर्क दिया कि भगवान राम की मूर्ति को सार्वजनिक चौराहों पर स्थापित करना सनातन धर्म की मर्यादाओं के विपरीत है। उनके अनुसार, देवी-देवताओं का स्थान मंदिर में होता है, न कि धूल और शोर-शराबे वाले सार्वजनिक चौराहों पर।

​ पूर्व विधायक ने सरकार से इस मामले पर पुनर्विचार करने की मांग की है ताकि सामाजिक संतुलन और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

वहीं ​इस मामले पर स्थानीय जनता दो फाड़ नजर आ रही है। एक पक्ष इसे भगवान राम के प्रति अपनी आस्था से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और प्रशासनिक नियमों की दुहाई दे रहा है।

“धार्मिक आस्था अपनी जगह है, लेकिन सरकार को अपने ही पुराने आदेशों और राज्य के महापुरुषों के सम्मान का भी ख्याल रखना चाहिए। शासनादेश के खिलाफ जाकर काम करना गलत परंपरा है।- भीमलाल आर्य, पूर्व विधायक घनसाली

अब सभी की नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस बढ़ते विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।