वीबी-जी राम जी अधिनियम में बड़ा बदलाव, शिकायतों के निस्तारण की समय-सीमा तय।

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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वीबी-जी राम जी अधिनियम के तहत शिकायत निवारण नियम, 2026 किए अधिसूचित

शिकायतों के त्वरित, पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण के लिए ग्राम पंचायत से जिला स्तर तक स्थापित होगी बहुस्तरीय व्यवस्था

शिकायतों की जांच 7 कार्य दिवसों में तथा निस्तारण 15 दिनों के भीतर करना होगा अनिवार्य

ऑनलाइन, हेल्पलाइन, स्पीड पोस्ट एवं व्यक्तिगत रूप से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा; अनसुलझी शिकायतें उच्च स्तर पर होंगी प्रेषित

नई दिल्ली। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात वीबी-जी राम जी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वीबी-जी राम जी शिकायत निवारण नियम, 2026 अधिसूचित किए गए हैं।

इन नियमों के माध्यम से योजना के क्रियान्वयन से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए एक व्यवस्थित, बहुस्तरीय, पारदर्शी एवं समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने की सरल सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना और शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर समाधान करना है।

ग्राम पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर पर होगी शिकायत निवारण व्यवस्था

अधिसूचित नियमों के अनुसार राज्य सरकारों द्वारा ग्राम पंचायत, ब्लॉक तथा जिला स्तर पर शिकायत निवारण की बहुस्तरीय व्यवस्था स्थापित की जाएगी। प्रत्येक स्तर पर नामित शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो शिकायतों को प्राप्त करने, उनका पंजीकरण करने, आवश्यक जांच कराने तथा निर्धारित समय-सीमा में उनका निस्तारण करने के लिए जिम्मेदार होंगे।

जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक शिकायत निवारण व्यवस्था की निगरानी करेंगे। उनका दायित्व होगा कि शिकायतों का समाधान निर्धारित प्रक्रियाओं तथा विकसित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।

शिकायत दर्ज कराने के लिए उपलब्ध होंगे कई माध्यम

नियमों के तहत योजना के क्रियान्वयन से संबंधित किसी भी विषय पर कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकेगा। इसके लिए नागरिकों को विभिन्न माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं।

इनमें नामित शिकायत निवारण अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से शिकायत प्रस्तुत करना, डिलीवरी प्रमाण के साथ स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेजना, केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना तथा टेलीफोन, निर्धारित हेल्पलाइन या राज्य सरकार द्वारा तय अन्य माध्यमों से शिकायत करना शामिल है।

ग्राम पंचायत, ब्लॉक अथवा जिला स्तर पर भौतिक रूप से प्राप्त होने वाली शिकायतों को उसी दिन निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। किसी अपरिहार्य कारण से उसी दिन पंजीकरण संभव नहीं होने की स्थिति में अगले कार्य दिवस तक शिकायत का पंजीकरण करना होगा।

शिकायत पंजीकृत होने के बाद शिकायतकर्ता को पावती उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें शिकायत की पंजीकरण संख्या, प्राप्ति की तिथि तथा शिकायत प्राप्त करने वाले अधिकारी का पदनाम दर्ज होगा। डिजिटल माध्यम से प्राप्त शिकायतों के लिए इलेक्ट्रॉनिक पावती तथा भौतिक माध्यम से प्राप्त शिकायतों के लिए भौतिक पावती दी जाएगी।

विशेष प्रावधान के तहत शिकायत के प्रारूप, भाषा, प्रस्तुत करने के तरीके अथवा किसी प्रक्रियागत कमी के आधार पर शिकायत का पंजीकरण करने से इनकार नहीं किया जा सकेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि प्रक्रियागत औपचारिकताओं के कारण कोई भी नागरिक शिकायत दर्ज कराने के अधिकार से वंचित न रहे।

7 कार्य दिवसों में जांच और 15 दिनों में करना होगा निस्तारण

शिकायतों के समयबद्ध समाधान के लिए नियमों में स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसके अनुसार प्रत्येक पंजीकृत शिकायत की जांच शिकायत प्राप्त होने की तिथि से 7 कार्य दिवसों के भीतर पूरी करनी अनिवार्य होगी।

जांच के दौरान शिकायत निवारण अधिकारी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आवश्यक अभिलेख, रजिस्टर, दस्तावेज, रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा तथा अन्य जरूरी जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे।

आवश्यकता पड़ने पर शिकायत का अंतिम निस्तारण करने से पहले शिकायतकर्ता को व्यक्तिगत रूप से अथवा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी प्रदान किया जाएगा।

जांच पूरी होने के बाद शिकायत निवारण अधिकारी अपने निष्कर्ष दर्ज करेंगे तथा अधिनियम एवं संबंधित नियमों के अनुरूप आवश्यक सुधारात्मक अथवा उपचारात्मक कार्रवाई करेंगे या करवाएंगे।

नियमों के अनुसार प्रत्येक शिकायत का निस्तारण उसकी प्राप्ति की तिथि से 15 दिनों के भीतर करना अनिवार्य होगा। जांच के निष्कर्षों और की गई कार्रवाई का पूरा विवरण निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज किया जाएगा तथा शिकायतकर्ता को भी इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगी शिकायतों की निगरानी

शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की गई है।

इसके माध्यम से शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक प्रत्येक चरण की डिजिटल निगरानी की जा सकेगी। शिकायत की स्थिति, जांच की प्रगति, अधिकारियों द्वारा दर्ज निष्कर्ष तथा की गई कार्रवाई का विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप से उपलब्ध रहेगा।

इस व्यवस्था से शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की प्रगति पर नजर रख सकेंगे तथा प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों की निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।

निर्धारित समय में समाधान नहीं होने पर उच्च स्तर पर जाएगी शिकायत

नियमों में शिकायतों के निस्तारण में देरी रोकने के लिए आगे की कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है। निर्धारित 15 दिनों की अवधि में जिन शिकायतों का समाधान नहीं हो पाएगा, उन्हें राज्य सरकार द्वारा स्थापित शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत अगले उच्च स्तर पर भेजा जाएगा।

उच्च स्तर पर शिकायत प्राप्त करने वाला प्राधिकारी मामले की जांच करेगा और उसके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। ऐसी शिकायतों का समाधान होने तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उनकी निगरानी जारी रहेगी।

शिकायत निवारण आदेशों के विरुद्ध अपील का भी प्रावधान

अधिसूचित नियमों में शिकायत निवारण व्यवस्था के अंतर्गत पारित आदेशों के विरुद्ध अपील करने की सुविधा भी प्रदान की गई है। ऐसी अपील वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 की अनुसूची-I में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार दायर एवं निस्तारित की जाएगी।

ग्रामीण नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ये नियम वीबी-जी राम जी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन तथा नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक संस्थागत एवं जवाबदेह व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

बहुस्तरीय शिकायत निवारण प्रणाली, शिकायत दर्ज कराने के विभिन्न माध्यम, अनिवार्य पंजीकरण, समयबद्ध जांच, 15 दिनों के भीतर निस्तारण, डिजिटल ट्रैकिंग तथा अनसुलझी शिकायतों को उच्च स्तर पर भेजने जैसे प्रावधानों से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इन नियमों का व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी किसी भी समस्या पर समय रहते कार्रवाई हो तथा ग्रामीण परिवारों के अधिकारों एवं पात्रता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, शिकायत निवारण प्रक्रिया को नागरिक-केंद्रित, सुलभ और प्रभावी बनाकर ग्रामीण विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।