घनसाली:- शिक्षा का मंदिर हुआ जर्जर तो नागराज मंदिर की शरण मे पढ़ रहे है बच्चे, घनसाली में शिक्षा व्यवस्था के दावे फेल।

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घनसाली:- सरकार एक और जहां शिक्षा के क्षेत्र में तरह-तरह के नए कदम उठा रही है वहीं दूसरी ओर विद्यालय भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण वर्षों से नहीं करा पा रही है जिस कारण टिहरी जनपद के भिलंगना ब्लॉक स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय सिलुड़ी 21 छात्र छात्राओं को कड़ी धूप और बरिश में बाहर बैठने को मजबूर हैं।

क्या है पूरा मामला देखिए हमारी खास रिपोर्ट

प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए सरकार तरह तरह के हथकंडे अपना रही है, विद्यालयों को कंप्यूटर लैब फर्नीचर जैसी व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है वहीं विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भवन ही ना हो तो स्मार्ट क्लास चला के क्या फायदा, ऐसा ही हाल है टिहरी जनपद के भिलंगना ब्लॉक स्थित रा.प्रा.वि सिलुड़ी बासर का जहां पर हालत इतने खस्ताहाल है कि बच्चों को मजबूरन कड़ी धूप और बारिश में भी बाहर बैठना पड़ रहा है ।
वही बच्चों से पूछे जाने पर बच्चों ने कहा कि हमें इस जर्जर स्कूल में डर लगता है जिस कारण हम अपनी पढ़ाई मंदिर के बाहर कर रहे हैं।
वहीं विद्यालय प्रधानाध्यापक तेजा सिंह कोहली ने बताया कि विद्यालय का निर्माण 2001 में हुआ था जबकि 2018 से विद्यालय क्षतिग्रस्त हो रखा हैं इस संबंध में एसएमसी द्वारा तीन बार खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है और लगभग 32 लाख का एस्टीमेट भी बनकर तैयार हो रखा है लेकिन अभी तक शासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं देखने को मिल रहा है।

वही मौके पर मौजूद तमाम ग्रामीणों ने कहा कि हम इस संबंध में सरकार को कई बार अवगत करा चुके हैं लेकिन 2018 से आज तक सरकार ने इस और कोई ध्यान नहीं दिया जबकि अन्य फिजूल कामों को पहले महत्व दिया जाता है जबकि जिस विद्यालय में 26 छात्र छात्राओं के भविष्य और जान के साथ खिलवाड़ हो रहा है जिसे लेकर ग्रामीणों ने बच्चों को बाहर बैठना ही उचित समझा और मंदिर के बाहर पठन-पाठन का कार्य किया जाता है।

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वहीं ग्राम प्रधान अनीता देवी ने बताया कि विद्यालय की खस्ताहाल स्थिति को लेकर कई बार विभाग को अवगत कराया गया है लेकिन आज तक विभाग और सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे है जबकि हमेशा खतरा बना रहता है।

आपको बता दें कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत लाखों रुपये की लागत से सरकारी विद्यालयों के भवनों का निर्माण कराया जाता है। पहले तो निर्माण के समय ही भवनों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगते हैं, फिर जैसे-तैसे स्कूल भवनों का निर्माण पूरा होता है, तो भवन ज्यादा समय तक अच्छी स्थिति में नहीं रहते। कहीं पर स्कूल भवन की दीवारों पर दरार आ रही है, तो कहीं फर्श उखड़कर मिट्टी बाहर निकल रही है। ऐसी स्थिति में भी भवनों की मरम्मत शिक्षा विभाग द्वारा नहीं कराई जाती है। धीरे-धीरे स्कूल के भवन की स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है।
घनसाली प्रखंड में देखा जाए तो कई सरकारी प्राइमरी, मिडिल व उच्च विद्यालय हैं, जिनमें से अघिकांश भवनों की हालत ठीक नहीं है। गडारा पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय सिलुड़ी भवन भी इन्हीं में से एक है। यहां पर स्कूल भवन में कमरे और बरामदा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रखा है , अब देखने वाली बात ये है सरकार इस और कितना गंभीरता से लेती है।

वहीं खंड शिक्षा अधिकारी सुमेर सिंह कैंतुरा ने बताया प्राथमिक विद्यालय सिलुड़ी के जर्जर भवन के पुनर्निर्माण के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है, लेकिन बजट की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस वित्तीय वर्ष में स्कूल भवन के मरम्मत के लिए बजट मिलने की उम्मीद है।