ब्रेकिंग:- राजकीय शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग को माननीय न्यायालय के अधीन करने के संदर्भ में मुख्यमंत्री को लिखा पत्र।

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देहरादून:- राजकीय शिक्षक संघ शाखा गढ़वाल मंडल ने शिक्षा विभाग के सभी मामले न्यायालय में लंबित होने के चलते परेशान होकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर शिक्षा विभाग को माननीय न्यायालय के अधीन करने का अनुरोध किया। राजकीय शिक्षक संघ ने पत्र में लिखा है कि

विषय- शिक्षा विभाग को माननीय न्यायालय के अधीन करने के संदर्भ में।

उपरोक्त विषय पर आपका सम्मानित ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण नवंबर 2000 को हुआ जिसमें कि राज्य के शैक्षिक संवर्धन हेतु शिक्षा विभाग का ढांचा भी स्थापित किया गया, इस ढांचे के अंतर्गत शासन स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक अलग-अलग स्थानों पर इसको संचालित करने के लिए कार्यालयों का निर्माण किया गया तथा इन कार्यालयों को संचालित करने हेतु लगभग हजार से ऊपर अधिकारियों को बैठाया गया ताकि यह ढांचा प्रदेश के नौनिहालों को एक मुकाम तक पहुंचाने वाले विद्यालयों को सही दिशा और दशा दे सके।

किन्तु बड़े खेद से यह पत्र आपको लिखना पड़ रहा है कि राज्य के निर्माण को 22 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और इस विभाग का स्तर नवीनतम राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण तथा पी जी आई इण्डेक्स की रिपोर्ट के अनुसार इस राज्य की स्थिति देश में सबसे न्यूनतम 36वें स्थान पर है। हर वर्ष माह अप्रैल में शिक्षा सत्र प्रारम्भ हो जाता है किंतु सरकार द्वारा छात्रों हेतु दी जाने वाली सहायता पुस्तक ड्रेस आदि समय से उपलब्ध न होकर सितंबर अक्टूबर तक प्राप्त होती है जिससे शैक्षिक वातावरण प्रभावित होता है। प्रतिदिन इस विभाग में नए-नए प्रयोग करने हेतु आदेश जारी होते हैं तथा शाम को वही आदेश रद्दी की टोकरी में चले जाते हैं इस विभाग में किसी भी अधिकारी के पास निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त नहीं है जिसे भी देखें एक दूसरे के लिए अग्रसारित करते देखा गया और जो अधिकारी निर्णय लेने की स्थिति में हैं उन्हें निर्णय नहीं लेने दिया जाता है जिसका परिणाम यह है कि सारे के सारे निर्णय माननीय न्यायालय में विचाराधीन हैं।

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वर्तमान में इस विभाग की सबसे छोटी इकाई विद्यालय है जहां पर प्रदेश के नौनिहालों का सर्वागीण विकास होने की बात कही जाती है किन्तु यहां की स्थिति बड़ी ही दयनीय है।

यहां पर लगभग 1200 से ऊपर प्रधानाचार्य 800 के लगभग प्रधानाध्यापक, 3600 से ऊपर प्रवक्ता एवं दो हजार से ऊपर सहायक अध्यापक के पद रिक्त चल रहे हैं और इन सभी का मामला माननीय न्यायालय में है और विभाग में बैठे अधिकारी इन मामलों पर कोई भी निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। शायद निर्णय भी माननीय न्यायालय द्वारा ही लिया जाना है।

अतः राजकीय शिक्षक संघ, शाखा गढ़वाल मंडल कार्यकारिणी आपसे विनम्र अनुरोध करती है कि जब सारे निर्णय माननीय न्यायालय द्वारा ही लिए जाने हैं। तो विभाग की आवश्यकता ही क्या है। प्रदेश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर सरकार में शिक्षा मंत्रालय सहित इस विभाग के समस्त स्थापित कार्यालयों को बंद करते हुए तथा लंबित मामलों के शीघ्रातिशीघ्र निदान करवाने हेतु इस विभाग को माननीय न्यायालय के अधीन करने की कृपा कीजिएगा ताकि नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ होने से बचा जा सके और माननीय न्यायालय भी स्वच्छंद होकर अपना निर्णय दे सके।